#Kavita by Minakshi Manhar

बाबुल मैं तेरे कण की किरण

तेरे आँगन में हो गयी रोशन

 

बचपन बीता तेरी बांहों में झूल कर

मन खुशबू  से हो गया चन्दन

 

अलबेली रही हर कदम पर मैं

तेरे दुलार से हो गयी अन्जन

 

बेखबर  हूँ चाहे जमाने के दस्तूर से

तेरे संस्कारों से हो गयी कुन्दन

 

सपने चाहे रह गये अधूरे मेरे

मन फागुन भी खो गया नन्दन

 

मीनाक्षी मनहर

 

 

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