#Kavita by Mukesh Bohara Aman

जीवन-दर्शन

 

तन की मिट्टी ,

फंसा हुआ यह ,

हंसा एक दिन उड़ जायेगा ।

 

पल दो पल के ,

यारानों में ।

मेले-झमेले ,

वीरानों में ।।

 

मन का हंसा ,

बसा हुआ यह ,

उससे एक दिन उड़ जायेगा ।

 

रिश्ते-नाते ,

उपमानों में ।

अपने-पराये ,

बेगानों में ।।

 

जग की रीति ,

कसा हुआ यह ,

सबसे एक दिन मुड़ जायेगा ।

 

रुपया दौलत ,

सामानों में ।

गिरा हुआ यह ,

दो आनों में ।।

 

लगता जग में ,

रमा हुआ यह ,

सच में एक दिन उड़ जायेगा ।

 

कवि मुकेश बोहरा अमन

बाल-गीतकार

बाड़मेर राजस्थान

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