#Kavita by Mukesh Bohara Aman

बाल-रचना

 

रंगों का संसार

 

एक सफेद और दो काला ।

कोट खरीदने पहुंचे लाला ।।1।।

 

लाला निकले, सपने लेकर ,

घर का जिम्मा, पत्नी देकर ।

 

बीच राह में, लाल सड़क पर ,

भूरे से ली , भूरी माला ।।2।।

 

लाला पहुंचे , मेले अन्दर ,

मेले में थे , काले बन्दर ।

 

हरे पेड़ पर, वो बन्दर थे ,

जिनसे पड़ा लाला का पाला ।।3।।

 

मेले में गये, कपड़ा हाट

जहां दुकानदार था देखे बाट ।

 

मैरून, कत्थई और फिरोजी ,

रंग दिखाये आला-आला ।।4।।

 

लाला बोले- कोट बताना ,

सफेद-काला, ही दिखलाना ।

 

कभी गुलाबी, कभी स्लेटी ,

व्यापारी दिखलाये नीला ।।5।।

 

कोई भी मन को न भाया ,

एक रंग भी पसंद न आया ।

 

कोट दिखाये , नीले-पीले ,

गहरा, फीका, हर चमकीला ।।6।।

 

पर न मिलें , मन चाहे कोट ,

लाला के मन , लग गई चोट ।

 

मन को समझा कर लाला ने ,

अन्त चुना फिर पीले वाला ।।7।।

 

मुकेश बोहरा अमन

गीतकार

बाड़मेर राजस्थान

8104123345

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