#Kavita by Mukesh Bohara Aman

एक गीत

 

 

पिया मिलन

 

 

पिया मिलन को आतुर नैनो,

सृष्टि के कण कण को देखो ।

 

प्राण प्रिय ‘वो’ पिया दिखेंगे,

जरा ठहर धड़कन को देखो ।।

 

सर सर बहती हवा सुहानी,

केवल गाती उसकी कहानी ,

 

कान लगाकर सुनो गौर से,

हवा के मन, कंपन को देखो ।

पिया मिलन को आतुर नैनो,

सृष्टि के कण-कण को देखो ।।

 

मंथर मंथर सरिता का जल,

सच होता है सृष्टि का कल,

 

जल के भीतर पिया तुम्हारे,

जल सागर का मंथन देखो।

पिया मिलन को आतुर नैनो,

सृष्टि के कण कण को देखो ।।

 

नभ में रहता सपने बुनकर,

सूरज चांद सितारे बनकर,

 

टिमटिम तारे अरे ! नैनों तुम,

हंसते नील गगन को देखो ।

पिया मिलन को आतुर नैनो,

सृष्टि के कण कण को देखो ।।

 

मही, पावक कण-कण होता,

दूध समाया मक्खन होता ,

 

सृष्टि सम्यक दृष्टि रखकर,

हृदय बसे अमन को देखो ।

पिया मिलन को आतुर नैनो,

सृष्टि के कण कण को देखो ।।

 

मुकेश बोहरा अमन ,गीतकार  .बाड़मेर राजस्थान

81041 23345

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.