#Kavita by Mukesh Bohara Aman

सरस्वती वंदना

 

 

 

हे शारदे मां , शारदे मां ।

ज्ञान का भण्डार दे मां ।।1।।

 

 

विमल वाणी विद्या वरणी ,

हस्त पुस्तक माला धरणी,

 

श्वेत वस्त्र वंदिता मां ,

बुद्धि का उपहार दे मां ।

 

शारदे मां शारदे मां

ज्ञान का भंडार दे मां ।।2।।

 

 

ध्यान और विज्ञान दे मां,

सबको सन्मति ज्ञान दे मां,

 

सारे जग के जीवो को मां,

असीमित तू प्यार दे मां ।

 

शारदे मां शारदे मां

ज्ञान का भंडार है माँ ।।3।।

 

 

आभा मंडल कर कमंडल,

कानों के माँ पावन कुंडल ,

 

चित्त हरे छवि आपकी माँ,

हमको जीवन सार दे मां ।

 

शारदे मां शारदे मां

ज्ञान का भंडार दे माँ ।।4।।

 

 

हम तो लोभी लालची माँ,

हम अभागे आलसी मां ,

 

एक दृष्टि से हमें माँ ,

इस भंवर से तार दे मां ।

 

शारदे मां , शारदे मां ,

ज्ञान का भण्डार दे माँ ।।5।।

मुकेश बोहरा अमन ,गीतकार , बाड़मेर राजस्थान

8104123345

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