#Kavita by Mukesh Bohara Aman

बाल-गीत

 

दादी मां को समर्पित

 

सबकी मनहर दादी मां

 

दादी मां, दादी मां,

आप हमारी, सबकी मां ।

 

सीधी सादी रहती, लगती,

लक्ष्मी जी हो दादी मां ।

 

अच्छे पें देती शाबासी,

खुशियों का घर, दादी मां ।

 

जग का सारा ज्ञान जिन्हें है,

सबसे सुपर, दादी मां ।

 

दादाजी भी डरते जिनसे,

वो है पाॅवर, दादी मां ।

 

कदम सभी के थम जाते है,

गुस्सा हो गर दादी मां ।

 

डांट पिलाते रहते, लेकिन,

सबकी मनहर दादी मां ।

 

हम बच्चों को देती है मन,

प्रेम की प्याली, दादी मां ।

 

भले हुए हो बुढे लेकिन,

सबसूं सुन्दर दादी मां ।

 

मुकेश बोहरा अमन

गीतकार

बाड़मेर, राजस्थान

8104123345

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.