#Kavita by Mukesh Bohara Aman

इंसानियत

 

 

 

गर दुनिया में,

कहीं रह सकी ,

तो रह सकेगी ,

जरा सी इंसानियत ।

 

 

शेष का मिटना ,

टूटना, सिमटना ,

सबकुछ कुदरत में,

होना तय है ।

 

 

 

अम्बर के सितारों का,

नदी के किनारो का ,

भंवरों की गुंजन और मिटना तय है,

तमाम नश्वर सहारों का ।

 

इन सब में ,

उसी इंसानियत के दीप को,

बचाना है हम सबको ,

 

ताकि कहीं बच सके ,

जरा सी इंसानियत ।

मुकेश बोहरा अमन

गीतकार

बाड़मेर राजस्थान,

8104123345

 

 

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