#Kavita by Mukesh Bohara Aman

गीत

 

छोड़ों वैर-भाव की बातें

 

छोड़ों वैर-भाव की बातेें ।

काली घोर अंधियारी रातें ।।1।।

 

किस्से-क्रोध, कषायों के घर ,

क्षमा के आंगन सौ सौगातें ।।2।।

 

सम्यक दर्शन, ज्ञान, चारित्र ,

जैसी जीवन हो बरसातें ।।3।।

 

स्नेह, समर्पण, अपनेपन संग,

मिले गले तो मन हरषाते ।।4।।

 

जग अपना घर, प्रीत बढ़ाओ ,

सदियों से रहे आते-जाते ।।5।।

 

‘अमन’ मुसाफिर पल दो पल के,

कट जायें पल गाते-गाते ।।6।।

 

मुकेश बोहरा ‘अमन’

गीतकार

बाड़मेर राजस्थान

8104123345

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