#Kavita by Mukesh Bohara Aman

बाल-कविता

 

हाथी और दर्जी

 

एक हाथी और दर्जी में था ,

बहुत घनेरा प्रेम, दोस्ती ।

प्रेम-भाव से मिलते-जुलते,

पाते सच्ची जीवन मस्ती ।।1।।

 

हाथी नदी किनारे हरदिन ,

करने जाता स्नान, जलपान ।

उसी डगर के बीच सफर में ,

आती थी दर्जी की दुकान ।।2।।

 

दर्जी देता रोटी रोज,

कभी न करता इसमें भूल ।

हाथी भी था प्रेम का पक्का,

लाकर देता ताजे फूल ।।3।।

 

एक दिन दर्जी की एवज में ,

बैठा था दर्जी का बेटा ।

बहुत शरारत, बदमाशी भी ,

करता था दर्जी का बेटा ।।4।।

 

हाथी आया सूंड पसारी ,

और लड़के ने सुई चुभो दी ।

चली आ रही प्रेम-परम्परा ,

क्षण में काट, दुश्मनी बो दी ।।5।।

 

हाथी को फिर आया गुस्सा ,

नदी में जाकर कीचड़ लाया ।

कीचड़ छिड़क, धो दिये कपड़े ,

बदमाशी का सबक सिखाया ।।6।।

 

दर्जी का बेटा हुआ अचंभित ,

लगा सोचने , यह क्या बला ?

हाथी कहने लगा, ओ ! सुन ले ,

कर भला तो हो भला ।।7।।

 

शिक्षा:- कर भला तो हो भला

 

मुकेश बोहरा अमन

बाल साहित्यकार

बाड़मेर राजस्थान

8104123345

 

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