#Kavita by Mukesh Bohara Aman

एक-गीत

 

 

जाग हारे, जाग प्यारे

 

 

जाग हारे, जाग प्यारे

मंजिलों के पथ पुकारे।

 

सृजना की शक्तियां लें,

क्यूँ बैठा तू हारे हारे ।।

 

 

 

टूट कर भी फिर से आते,

हौसला रखना सिखाते ,

 

टिमटिमाना, मुस्कुराना,

आसमां के शुभ्र तारे ।

 

 

 

ध्वनियों का शोर है यहां ,

ऐसा सब कुछ और है कहां,

 

क्यों सुनाई नहीं देते हैं,

शंख के संघोष सारे ।

 

 

 

कर्म से यूँ विमुख होकर,

चौराहे पर खुद को खोकर

 

कौन है वह लोग ऐसे ,

फिर रहे बस मारे मारे ।

 

 

 

कब तलक चलता रहेगा,

‘अमन’ रवि कहता रहेगा,

 

रश्मियों की, पंछियों की,

जाग बंधु सुन पुकारे।

 

 

 

जाग हारे, जाग प्यारे,

मंजिलों के पथ पुकारे।।

 

 

मुकेश बोहरा अमन

गीतकार

बाड़मेर राजस्थान

8104123345

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