#Kavita by Mukesh Bohara Aman

एक नवगीत
ये रिश्ते जो

ये रिश्ते जो ,
हसीं, सुनहरे ,
महकता संसार है मेरा ।
मेरे घर के सूरज-चंदा,
मेरे प्यारे दादा-दादी ।

मम्मी-पापा, भैया-भाभी,
बहना है फूलों की वादी ।।
ये सारे सब ,
प्रेम का सागर ,
मुस्काता परिवार है मेरा ।
घर की चिड़िया, घर की बुलबुल,
संध्या बेटी हँसती पल-पल ।

नन्ही-नन्ही इन कलियों से ,
घर की रौनक, घर की हलचल ।।
सबके मन की ,
एक लय, धुन से ,
चहकता घर-बाहर है मेरा ।
मुकेश बोहरा अमन
नवगीतकार
बाड़मेर राजस्थान
8104123345

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