#Kavita by Mukesh Bohara Aman

क्या धन देगा मुझे उबार ।

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जब दिन होगा मरण द्वार पर,

क्या धन देगा मुझे उबार ।

बार बार सोचा है , सोचूं ,

धन के मोह को डालूं मार ।।

 

उसकी दस्तक मांगे जीवन,

तब क्या करेगा लाखों का धन ,

जीवन से धन सम्भव लेकिन,

धन से जीवन , सोच बेकार ।

 

ऋतुओं पर ऋतुओं का आना,

कुदरत का सब आना जाना,

धन से कभी ना रूकती कुदरत ,

कुदरत चले बस अपनी धार ।

 

हर पल चिन्तन केवल धन का,

मोल नही समझा जीवन का ,

धन नही, जीवन से ही होगी,

अपनी नैया सागर पार ।  मुकेश बोहरा अमन  – 8104123345

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