#Kavita by Mukesh Bohara

बाल-रचना
मीठी सर्दी अब आई है ।

अपने घर परिवेश में फिर ,
मीठी सर्दी अब आई है ।।

रातें लम्बी, लम्बी-लम्बी,
छोटे-छोटे दिन लाई है ।।

सुबह सवेरे घना कोहरा ,
दिन में धूप सुहानी लगती ।

बंद घरों में शीत हवाएँ,
ठंडा ठंडा पानी लगती ।।
बर्फीले पहाड़ों से होकर ,
हमसे मिलने आ पाई है ।

अपने घर परिवेश में फिर ,
मीठी सर्दी अब आई है ।

सर्दी के दिन मन को भाते,
लगते हैं अलबेले मेले ।

अच्छे लगने लगते हैं फिर ,
चाट पकौड़ो वाले ठेले ।।
कांप रहे है पशु पक्षी पर ,
सबके मन को भाई है ।

अपने घर परिवेश में फिर,
मीठी सर्दी अब आई है ।।

तली भुनी और गर्म वस्तुएं,
खाने को सच करता है मन ।

ऊनी कपड़े सब के तन पर ,
अलाव तापने लगता है जन ।।

पेड़ों की डाली पर चिड़िया ,
वन में कोयल मुस्काई है ।

अपने घर परिवेश में फिर ,
मीठी सर्दी अब आई है ।।

रातें लम्बी, लम्बी-लम्बी,
छोटे-छोटे दिन लाई है ।।
मुकेश बोहरा अमन
गीतकार, बाल साहित्यकार
बाड़मेर, राजस्थान
8104123345

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