#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

जो तुमको अच्छा लगे

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जो तुमको अच्छा लगे

वह मैं लिख नहीं सकता

 

जो तुमको अच्छा लगे

वह मैं कर नहीं सकता

 

जो तुमको अच्छा लगे

वह मैं कह नहीं सकता

 

तुम कहोगे दिन को रात

और ऐसा हो नहीं सकता

 

तुम करोगे भाई-भतीजावाद

और मैं यह सह नहीं सकता

 

तुम झूंठा देशप्रेम दिखाओगे

पर मैं ये ढोंग कर नहीं सकता

 

तुम बांटोगे नफरत के विष से

फिर मैं चुप रह नहीं सकता

 

जो तुमको अच्छा लगे

वह मैं लिख नहीं सकता

 

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर,

फतेहाबाद, आगरा, 283111

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