#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

पेड़ लगाओ

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धरती का श्रृंगार हैं |

श्रष्टि का आधार हैं ||

 

पेड़ लगाओ |

धरती बचाओ ||

 

पेड़ों से सांसें चलती |

पेड़ों से बारिशें होती ||

पेड़ मिटाते प्रदूषण |

पेड़ प्रकृति के आभूषण ||

 

पेड़ लगाओ |

धरती बचाओ ||

 

पेड़ रोकते तेज हवाएं |

देते मंद-मंद शीतल हवाएं ||

प्रहरी बन नदियों की कटान रोकते |

आसमान से नीर सोखते ||

 

पेड़ लगाओ |

धरती बचाओ ||

 

फल-फूल हमें देकर |

हम पर करते बड़ा उपकार ||

धरती का श्रृंगार हैं |

श्रष्टि का आधार हैं ||

 

पेड़ लगाओ |

धरती बचाओ ||

 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर,

फतेहाबाद-आगरा 283111

 

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