#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

सबसे कहती गौरेया

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दुःख के सागर में गोते खा रही गौरेया

बिन पेडों की छॉव के घुट-घुट मर रही गौरेया

 

पेड़ न काटो रे भैया !

पेड़ हैं धरती का श्रृंगार

प्रकृति का है अनुपम प्यार

 

पेड़ अगर सारे कट जायेंगे

कहो कहाँ ये जीव-जन्तु सभी जायेंगे

 

सबसे कहती गौरेया

पेड़ न काटो रे भैया !

 

पेड़ों से मिलती शुध्द हवा

पेड़ हैं जीवन जीने की दवा

 

पेड़ों से जल है

जल से जीवन

जीवन से दुनियॉ

 

पेड़ न काटो रे भैया l

सबसे कहती गौरेया  ll

मुकेश कुमार “ऋषिवर्मा” . ग्राम रिहावली, फतेहाबाद, आगरा

M.9627912535

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