#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

बाल कविता – तितली

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लाल-हरी-नीली-पीली,

रंग- बिरंगी है तितली |

 

फूल-फूल से रस पीती,

इठलाती फिर उड़ जाती |

 

कभी यहाँ तो कभी वहाँ,

उड़ती जाने कहाँ-कहाँ |

 

पीकर मधु होती मदमस्त,

कभी न देखा इसको सुस्त |

 

छैल-छबीली, रंग-रंगीली,

लाल-हरी- नीली -पीली |

 

बाग-बगीचों की रौनक,

बच्चों की है मनमोहक |

 

इन्द्रधनुषी-सप्तरंगों वाली,

प्यारी-न्यारी,नन्हीं तितली |

 

कोमल-कोमल पंखों वाली,

रंग- बिरंगी सुन्दर तितली |

 

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर,

फतेहाबाद-आगरा, 283111

मो. 9927809853

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