#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

हिंदी भाषा प्यारी है

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हिंदी भाषा प्यारी है,

महिमा इसकी न्यारी है ||

 

सुर-तालों से सजी हुई,

रस-छंदों से मंझी हुई ||

 

भारत भू की शान हिंदी,

हमारी अमिट पहचान हिंदी ||

 

शुध्द – सरल अतिभारी,

सुभाष-भगत की दुलारी ||

 

ऋषि-मुनियों की अमृत वाणी,

संस्कृत जननी की अमर कहानी ||

 

कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैली,

बनी हिंद के माथे की चंदन-रोली ||

 

हिंदी अपनी पहचान है,

सब जन मिल करो सम्मान है ||

 

हिंदी भाषा प्यारी है,

महिमा इसकी न्यारी है ||

 

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

ग्राम रिहावली, पो. तारौली,

फतेहाबाद, आगरा, 283111

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