#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

दर्द जुदाई

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दर्द जुदाई सह नहीं पाते हैं

किसी के सामने आंसू बहा नहीं पाते हैं

 

प्रेम की डोरी तुमसे लगाई

उसे तोड नहीं पाते हैं

 

सूनी अँखियाँ राह देखतीं

किसी से कुछ कह नहीं पाते हैं

 

जीना हुआ बहुत मुश्किल

करके तुम्हें याद मर भी तो नहीं पाते हैं

 

एक आस लगी छोटी सी

उस आस के सहारे जीए जाते हैं

 

तुम आओगे एक दिन

रब से यही दुआ किए जाते हैं

 

दर्द जुदाई सह नहीं पाते हैं

किसी के सामने आंसू बहा नहीं पाते हैं

 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

ग्राम रिहावली, डाक तारौली,

फतेहाबाद, आगरा, 283111

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