#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

बिजूखा

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एक वक्त था

जब वो जिंदा आदमी सा काम करता था

निर्जीव था इसीलिए

न हिलता, न ढुलता

दिन हो या रात

सर्दी, गर्मी और बरसात

सब में तैनात रहता था वो

वैसे रात का सम्राट था वो

जानवर तो छोडिए

आदमी भी ड़र जाता था उससे

पर अब कोई नहीं डरता उससे

न जानवर, न आदमी

इसीलिए धीरे-धीरे खेतों से, खलियानों से

गायब होता जा रहा है

बिजूखा…

 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर,

फतेहाबाद, आगरा, 283111

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