#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

उर में बसी

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उर में बसी

आंखों में सजी

तसवीर तुम्हारी, प्यारी – सी

 

भूल नहीं सकता

बीच राह में छोड़ नहीं सकता

याद है कसम तुम्हारी

सात जनम तक

संग जीने मरने की

अगर रूठ जाओ तुम

फिर तुम्हें मनाने की

 

उर में बसी

आंखों में सजी

तसवीर तुम्हारी, प्यारी – सी…

 

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

गॉव रिहावली, डाक तारौली गुर्जर, तहसील फतेहाबाद, आगरा, 283111

 

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