#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

लेकर वोट हमारा
———————

लेकर वोट हमारा
वो सरताज हो गए
हम भटक रहे दर-दर
उनके अन्दाजे खास हो गए
वो खेल रहे अरबों-खरबों से
हम दाने-दाने को मोहताज हो गए
हमारे देश के नेता सारे
चोर-लुटेरे, बेईमान हो गए
जो चले सत्यपथ पर
वो न जाने कहाँ गुम हो गए
पल-पल रंग बदलता शासन
गिरगिटिया से हुक्मरान हो गए
लुटवा-लुटवा कर घर गरीबों के
विकास पुरुष के कागजी विकास हो गए
लेकर वोट हमारा
वो सरताज हो गए
दिखा-दिखा कर नौटंकी
संसद वाले नौटंकीबाज हो गए
भूख, गरीबी, बीमारी और बेरोजगारी नहीं दिखे
दिल्ली वाले आका आँखों से अंधे हो गए
लेकर वोट हमारा
वो सरताज हो गए |

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाक तारौली, फतेहाबाद, आगरा, 283111

Leave a Reply

Your email address will not be published.