#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

प्रेमदीप
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निसदिन प्रेमदीप जलाते चलो,
जीवन को गतिमय बनाते चलो ||
मिलाके कदम से कदम साथी तुम,
सदा आगे ही आगे बढा़ते चलो ||

मन की चिंता को मिटाते चलो,
करुणामय प्रभु को याद करते चलो ||
जगाके उर में आत्मविश्वास तुम,
उज्ज्वल जीवनज्योति जगाते चलो ||

उमंगों के पुष्प खिलाते चलो,
राहों में खुश्बू के रंग बिखराते चलो ||
कष्ट हों अपार गीत गुनगुनाओं तुम,
सूखे हृदयों में प्रेमरस छलकाते चलो ||

कर्म अपने तुम सरस बनाते चलो,
दोष – दुर्गुण सब मिटाते चलो ||
घट-घट में वासी ईश्वर मत भूलो तुम,
भक्ति की ज्योति जलाते चलो ||
– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

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