#Kavita by Mukesh Kumar Rishi Verma

शराब करती खराब
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शराब छोड़ दो
बिल्कुल मत पीना
शराब करती खराब
मन को, तन को
ये बुध्दि को हरलेती,
गंदे नालों में नहलवा देती |

पीना शराब तुमको
बहुत मंहगा पड़ेगा
खेत-घर सब बिकेगा
दाने-दाने को हो जाओगे मोहताज
इज्जत हो जाये खराब,
छोड़ दो भैया शराब |

रोग लग जायेंगे हजार
परिवार भी हो जाये बेकार
भयानक मंजर हो बरबादी का
पागल कहलाओगे
बिल्कुल मत पीना,
सम्मान से जीना |

अवगुण भारी शराब
मनुष्य को बनाती पशु
इंसानियत को मारती
शैतानियत को जगाती
शराब पीना छोड़ दो जनाब,
शराब करती खराब |

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाक तारौली,
फतेहाबाद, आगरा, 283111

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