#Kavita by Mukesh Madhuram Bareli

आशाओं और विश्वास से हर लक्ष्य मिल जायेगा

जो हो जाओगे निराश तो भाग्य भी रूठ जायेगा

 

असम्भव नहीं है कुछ भी यहाँ बस मानने की बात है

विश्वास है स्वयं पर तो हारा हुआ मनुज भी जीत पायेगा

 

जिसने भी पाया है जग में पहले स्वयं पर विश्वास किया है

शंका का तो कोई समाधान कभी समाधान न बन पायेगा

 

जीवन्त बनो सजग रहो और दुनिया को बहुत प्यारा मानो

दूसरों पर वही विश्वास करेगा जो स्वयं पर अपना विश्वास पायेगा

 

हर ओर उपजी है निराशा हर ओर हताशा का धुन्ध है

उसी का कल्याण होगा जो हृदय से सर्व कल्याण  चाहेगा

 

प्रकृति इतनी है प्रसन्न नित रोज मानवजनित गरल पीकर

दूसरों को जो उदास करना चाहे फिर वही उदास हो आयेगा

 

अमंगल भी मंगल हो ही जाता रहा है सच्चे मानुष को

झूठे दम्भी लोभी का विदित सर्वनाश  फिर नया कलेवर लायेगा

 

जी भी रहे सत् के पथ पर रास्तों में रहे गिरते-उठते

जब आ पहुँचे लक्ष्य निकट तो हर कण्टक पुष्प पल्लव हो आयेगा

 

सच्चे पथ पर भटकों को भी पथप्रदर्शक मिल ही जाते हैं

क्योंकि जिसका चुनाव यही है उसको भगवान भी आशीष पहुँचायेगा

 

सुगन्ध अनूठी होती है जब जीवन प्रेम लुटा पाता है

वरना कुण्ठित हृदय कलुषित मन कैसे जनमानस को हर्षायेगा

 

सद् विचार सच्ची भावनाओं के यज्ञकुण्ड में मधुरम् उपजे ओज्

तब ही विसंगतिपूर्ण वातावरण का कण-2 पुनः सुवासित हो जायेगा!

 

-मुकेश मधुरम्

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