#Kavita by Mukesh Marwari

व्यंग्य घनाक्षरी:-

 

त्रेतायुग में थे राम,

अब आये सलमान,

मृगतृष्णा जो भी थी वो,

अब बुझ पाई ना ।

 

राम ने खोयी थी सीता,

खान का जीवन बीता,

राम को ना खान को भी,

लुगाई वों पाई ना ।

 

राम लड़े रावण से,

खान लड़ता कोर्ट में,

दोनों ने शिकार माना,

हिरण को जच के ।

 

चलो अब जेल तुम,

रहीम है आशाराम,

हनीप्रित तुम्हें कोई,

अब मिल पाई ना ।

😝😝😝😝😝

कवि मुकेश मारवाड़ी

“नवलपुरी”

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