#Kavita by Munish Bhatiya Ghayal

वाह मिली वाही मिली पर बीवी अनचाही मिली

सोचा साली तो सुंदर है लेकिन वो भी ब्याही मिली

साले की बीवी देखी तो कुछ दिल को सुकून मिला

हाथ लगी निराशा यहां भी वो कहती हमको भाई मिली

आंख में काजल लबों पे लाली खूबसूरती का ठोर नहीं

मैं कहता उसको सासु मां वो कहती हमें जंवाई मिली

आस नहीं छोड़ी हमने ओर तकने लगे पड़ोसन को

किस्मत फूटी ये आस भी टूटी वो बीवी की ताई मिली

सूरत से विचलित हो घायल भूल गया क्यों सीरत को

प्राणों प्यारी नौकर सरकारी तुझको लगी लगाई मिली

वाह मिली वाही मिली ओर बीवी मनचाही मिली

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