#Kavita by Naaz Ozair

पानी

तुम जो हर रोज़ नहाते हो ,
ज़रुरत से ज़्यादह हमें बहाते हो ,
तारीफ़ तो तुम साबुन की ही करते हो,
पर मेरे बलिदान को भुलाते हो।

बग़ैर मेरे , साबुन लगा कर दिखाओ ,
मैं पानी हूँ ,मुझे बर्बाद होने से बचाओ ,

ऊंची -ऊंची इमारत बनाते हो ,
आसमानों में पार्टी भी मनाते हो,
तबाही के लिए एटम भी बनाया,
सभों को सही-ग़लत पढ़ाई-पढ़ाते हो ,

दम है तो, दो बूूंद ही मुझे बना कर दिखाओ ,
मैं पानी हूँ ,मुझे बर्बाद होने से बचाओ।

मुझे जो इस तरह बहाओगे तुम ,
ये जान लो, एक दिन बहुत पछताओगे तुम ,
ये पेड़ – पौधे सभी सूख जाएंगे ,
और कपड़े बिन धोये ही सुखाओगे तुम ,

नाज़ मेरा ये दर्द लोगों तक पहुँचाओ ,
मैं पानी हूँ ,मुझे बर्बाद होने से बचाओ।

नाज़ ओजैर नाज़

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