#Kavita by Naaz Ozair

माँ की सेवा

इस कलयुग में भूल गए हम ईश्वर का पैगाम ,
माँ की सेवा इस दुनियाँ का सबसे उत्तम काम।

जिसने तुझे परवान चढ़ाया,जिसने तुझे बलवान बनाया,
जिसने अपनी नींदे खोई,लोरी गा  के तुझे सुलाया,
स्वर्ग है उस पाँव के नीचे उस को कर प्रणाम,
माँ की सेवा…….

काशी जाओ मथुरा जाओ या काबे में सर को झूकाओ,
सत्य गुरु का नाम लो चाहे गिरजा के फादर बन जाओ,
माँ से बड़ा न तीरथ कोई और न कोई धाम ,
माँ की सेवा………

एक दिन ऐसा भी आता है प्रेमी दुश्मन बन जाता है,
रिश्ते सारे कट जाते हैं संकट का जब दिन आता है,
उस दम भी छलका करता है ममता का ये जाम ,
माँ की सेवा……..

माँ तुम्हारी जैसी भी हो नाज़ उसे तुम उफ़ न बोलो,
बचपन अपना याद करो तुम पाँव उसका धो-धो पियो ,
अपमानित न होने पाए ममता का शुभ नाम ,
माँ की सेवा…….

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