#Kavita by Naaz Ozair

जिंदगी धोका है ।

जिंदगी सिर्फ एक धोका है
जाने किस मोड़ पे बिछड़ जाए

इसकी बातों में तुम नहीं आना
वरना एक दिन पड़ेगा पछताना
इसकी इक-इक अदा में जादू है
सारी दुनियाँ पे इसका काबू है
यह तुम्हे आसमान बना देगी
फ़िर अचानक जमीं चटा देगी

इसकी बातों में तुम नहीं आना
जिंदगी सिर्फ एक धोका है ।

इसकी जूल्फों का जो असीर हुआ
दोनों आलम में वह फकीर हुआ
इसकी आँखों में है अजब मस्ती
जिसके आगे है जान भी सस्ती
यह फकत ख्वाब ही दीखाएगी
और    ताबीर     न    बताएगी

इसके वादों पे तुम नहीं जाना
जिंदगी सिर्फ एक धोका है ।

इसके चलने में जो नजाकत है
उस में पोशीदह एक कयामत है
इसकी अंगड़ाईयां है होश रूबा
इसकी रअनाइयाें पे जान फिदा
इसकी कदमों में ताजशाही है
इसकी ठोकर में बादशाही है

इसकी कसमों पे तुम नहीं जाना
जिंदगी   सिर्फ  एक  धोका   है ।

हादसा रु नुमा अजीब हुआ
हुस्ने युसुफ उसे नसीब हुआ
हार बैठी हैं दिल जुलेखाऐं
उँगलियाँ आप तो न कटवाऐं
वरना इस दुनियाँ में हँसी होगी
जान आफत में यह फँसी होगी

इसके झांसे में आप न आऐं
जिंदगी सिर्फ एक धोका है ।

इसके सीने में दिल है पत्थर सा
बेवफा है यह मीर जाफ़र सा
घोल देता है ज़हर खुशियों में
इसका चर्चा है ऋषी मुनियों में
इस से बेजा सवाल मत करना
अपना जीना मुहाल मत करना

जिंदगी सिर्फ एक धोका है
जाने किस मोड़ पे बिछड़ जाए ।

क्यूं बनाते हो महल ख्वाबों का
क्या हमेशा यहीं है रहने का
दिल कि आँखे को खोल के देखो
अपने अंदर टटोल के   देखो
फिर यकीनन यह जान जाओगे
नाज़ का कहना मान जाओगे

जिंदगी सिर्फ एक धोका है
इसकी बातों में तुम नहीं आना।

नाज़ ओजैर नाज़

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