#Kavita by Nand Lal Mani Tripathi

माँ

 

माँ मैं जब रोता था

तू बेचैन हो जाती

मेरी खुशियों की खातिर

दुनिया समेट लाती

अपने दामन में

जो भी मेरी चाहत की जिद्द होती ,

 

 

तेरी कोशिश तू भर दे

मेरी भावों में रख दें

मेरे हांथों में!!

मैं जब सोता

तू जगती

मुझेको निहारती

पल पल

अपने आँखो के काजल से

मेरी नजर उतारती

देती निर्भय का बरदान!!

 

माँ मैं दुनियाँ में आने से पहले 

तेरी कोख में आया

मैं जब तेरी कोख में अटखेली करता

तुझे करता परेशान

तब भी तू अपने

ख्वाबों को देती

कितने ही नाम

आँखो का तारा

राज दुलारा

खुद के जीवन की दौलत

दुनियाँ अभिमान!!

 

 मेरी खुशियाँ

तेरी दुनियाँ भर की दौलत

मैं तेरे जीवन की

चाहत की दुनियाँ!!

 

 दुनियाँ में जब रखा मैंने

अपना पहला कदम,

मेरे जीवन की शक्ति

मेरा अस्तित्व का आधार

तेरे स्तन का अमृत पान!!

 

मेरे आँखो के आँसू से

तू तड़प उठती

मेरी खुशियों,रक्षा की खातिर 

तू रणचण्डी, दुर्गा, काली

दुष्ट विनाशक साक्षात महाकाल!!

 

मेरी चांद के पाने की अभिलाषा

भी नहीं करती तुझे परेशान

तू मेरे बचपन के जज्बे

जज्बातों में रख देती

अपने अरमानों का सूरज चांद!!

 

 

मेरे लिए तेरी गोद 

सबसे बढ़ा सिंहासन

दुनियाँ

तेरे ममता के आँचल की छाया

सम्पूर्ण ब्राह्मण

भगवान् नहीं देखा मैंने

देखा तो तेरा चेहरा

तेरे चेहरे में भगवान्!!

 

 

माँ तू मूरत है

तू सूरत हैं

तू साक्षात है

हर संतान की भाग्य भविष्य

खुदा भगवान्

माँ महत्व का ही युग संसार!!

 

एन एल एम त्रिपाठी पीताम्बर

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