#Kavita by Nand Lal Suthar

राही

 

 

न जाने तू क्या चाहता है?

क्यों है तू इतना बेकरार?

उलझन तेरी क्या है आखिर?

तू गुमसुदा सा रहता है।

 

इस रंग बिरंगी दुनिया मे ,

तू भी रंगीला हो सकता है।

मजबूरी तेरी क्या है आखिर?

तू तन्हा तन्हा रहता है।।

 

 

इस टिमटिमाती दुनिया मे,

तू भी दीपक हो सकता है।

दुविधा तेरी क्या है आखिर?

तू अंधियारे में रहता है।।

 

तू हो खड़ा अब राह में,

मंजिल को तू भी पायेगा।

हो दौड़ में लाखों मगर,

तू जीतता ही जायेगा।

 

रख हौसला तू अपने अंदर,

कुछ धैर्य से भी काम कर,

राहों में कांटे हो भले,

तू उनको कुचलता जाएगा।

 

तू अब न निराश हो ऐ राही,

शक्ति अपनी पहचान जरा।।

 

 

 

नन्दलाल सुथारविद्यार्थी

 

रामगढ़,जैसलमेर(राजस्थान)

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4 thoughts on “#Kavita by Nand Lal Suthar

  • December 7, 2017 at 7:30 am
    Permalink

    अति सुंदर अभिव्यक्ति

  • December 7, 2017 at 7:33 am
    Permalink

    अति सुंदर अभिव्यक्ति जनाब ‘विद्यार्थी’

  • December 7, 2017 at 11:44 am
    Permalink

    Nice
    अछि रचना ह लगे रहो

  • December 7, 2017 at 3:42 pm
    Permalink

    आभार
    आपका स्नेह यूँही बना रहे।

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