#Kavita By Narendra Ranawat

जाती पांति के बंधन तोड़ो
सब एक दूसरे को जोड़ो
नही जगत में कुछ भी अपना
छोड़ो झूठी माया का सपना

वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना जगाकर
सत्य अहिंसा की हम ज्योत जलाए
सब आपसी मनमुटाव भुलाकर
एक दूसरे को गले लगाए

नफरत की दीवारें मिटाकर
साम्प्रदायिकता की होली जलाए
गीत ख़ुशी के हम सब गाए
आओ मिलकर होली मनाए
नरेंद्र राणावत , मूली चितलवाना
जिला जालौर , राजस्थान
+919784881588

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