#Kavita By Narpat Parihar

नारी तुम कौन हो
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नारी तुम शक्ति हो ।
शिव रूपा शक्ति या श्रद्धा-भक्ति हो।
तुम सृष्टि निर्मात्री हो
माता हो, जननी हो या ममता की प्रतिमूर्ति हो।
प्रिया-प्रेयसी, जीवन-संगिनी या सहधर्मिणी हो।
नारी तुम
प्यार हो, विश्वास हो ।
टूटी उम्मीदों की आस हो ।
नारी तुम हर घर की श्वास हो।
तुम सुने आँचल की आवाज़ हो।
नारी तुम
खुशियों का संसार हो ।
मानव जीवन का गुलज़ार हो ।
नारी तुम प्रेम का अंगार हो।
निज परिवार का श्रृंगार हो।
नारी तुम
वीर नारी हो ।
तूं ही झांसी वाली रानी हो।
जगत् का खाका खींचने वाली हो।
तुम दुर्गा ,लक्ष्मी, महाकाली हो।

फिर भी ‘विद्रोही’ तुम्हें पुछ रहा
कौन तुम वनिता हो ।
कल्पना चावला या विलियम्स सुनीता हो ।
नरपत परिहार ‘विद्रोही’
वणधर, रानीवाड़ा (जालोर)
मो. 9166412907

3 thoughts on “#Kavita By Narpat Parihar

  • March 8, 2019 at 12:37 pm
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    वाह क्या क्या बात है ।
    बहुत खूब कवि महोदय।

  • March 8, 2019 at 12:41 pm
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    वाह! बहुत खुब लिखा है।

  • March 8, 2019 at 5:28 pm
    Permalink

    Sir it’s awesome

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