#Kavita By Narpat Parihar

मेवाड़ की धरती को नमन्
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मेवाड़ की धरती को मैं नमन् करने आया हूँ ।
मैं बलिदानो की गाथा गाने आया हूँ
मैं देशभक्ति का गीत सुनाने आया हूँ ।

14वीं सदी के आरम्भ में रत्नसिंह ने राज किया ।
उन पर खिलजी ने वार किया।
मातृभूमि की खातिर गोरा-बादल ने बलिदान दिया।
जिस धरती पर रानी पद्मिनी ने जौहर किया ।
मैं उस धरती को नमन् करने आया हूँ ……..

पितृभक्ति की खातिर राणा चुण्डा ने भीष्मप्रतिज्ञा की।
हंसा बाई के लाल को राज सिंहासन की गद्दी दी।
मोकल का बन सरंक्षक जब रणमल ने गद्दारी की।
जिस धरती पर राणा चूण्डा ने रणमल को मार खुद्दारी की।
मै उस धरती को नमन् करने आया हूँ ……

आधुनिक चित्तौड़ का निर्माता बन आया हिन्दू सुरताण था।
सशक्त स्थापत्य का निर्माण कर भारत में पाया ऊँचा स्थान था ।
महमूद खिलजी को सारंगपुर में धुल चटाई वो हिन्दू सुरताण था ।
जिस धरती पर विजय का गुणगान करता विजय स्तम्भ बनाया था।
मैं उस धरती को नमन् करने आया हूँ ……..

अनगिनत ज़ख्म सहे जिन्होंने अपने तन पर,
बचपन से लेकर मृत्यु तक सारा जीवन युद्धों में बिताया था ।
क्षात्र गौरव को अक्षुण्ण रख भारत का मान बढ़ाया था ।
तब महाराणा सांगा हिन्दुवा सूरज कहलाया था ।

दिल्ली,गुजरात,मालवा के सुल्तान जिनसे डरते थे।
बीस किलो की तलवार लेकर वो रणभूमि में चलते थे ।
अस्सी थे घाव तन पर फिर भी वो लड़ते थे ।
अदम्य साहसी थे वो महाराणा सांगा कहलाते थे।
ऐसी वीर प्रसूता भूमि को मैं नमन् करने आया हूँ …………………..

राष्ट्रधर्म की कर्तव्य निष्ठा पर अपने पुत्र का बलिदान दिया ।
सर्वस्व स्वामी को अर्पण कर मेवाड़ राजवंश बचा लिया ।
धन्य है स्वामिभक्त वीरांगना पन्ना को जिसने कर्तव्यपूर्ति का प्रण लिया ।
अपने पुत्र की कुर्बानी देकर देश धर्म पर हृदय लुटाना सीखा दिया ।
जिस धरती पर पन्ना ने जन्म लिया मैं उस धरती को नमन् करने आया हूँ ……………

सन् 67में अकबर ने जब आक्रमण किया ।
भूखे शेर बन जयमल-पत्ता ने केसरिये का वरण किया ।
अनगिनत वीरांगनाओं ने अपने अस्मत की खातिर जौहर किया ।
जिस धरती पर इन वीर-वीरांगनाओं ने जन्म लिया ।
मैं उस धरती को नमन् करने आया हूँ ……………………

अरि रक्त से सनी अवनी चन्दन सी सुगंधित हुई ।
हल्दीघाटी रंगी खून से शत्रु सेना देख अचंभित हुई।
अप्रतिम शौर्य दिखा प्रताप की तलवार रक्तरंजित हुई।
जिस धरती की रक्षार्थ मानव ही नहीं, पशु (चेतक) ने भी अपने प्राण अर्पित किये।
मैं उस धरती को नमन् करने आया हूँ ।
मैं बलिदानो की गाथा गाने आया हूँ ।
मैं देशभक्ति का गीत सुनाने आया हूँ ।

नरपत परिहार ‘विद्रोही’
वणधर ,रानीवाड़ा,जालोर
मो. 9166412907

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