#Kavita by Nawal pal Prabhakar

तलहटी में नदी

 

पहाड़ की तलहटी में,

बहता हुआ पानी

उस वक्त मन को मोह गया

जब वह बहता गया, बहता गया।

 

पानी के इस छोर पर

पानी के उस छोर पर,

तैरते हुए पक्षियों का झुंड

कल-कल पानी की ध्वनि सुन

 

ये गया ओर वो गया।

जब वह बहता गया, बहता गया।

 

हरियाली दोनों किनारे

एक-दूजे के सहारे

मध्य पड़े  पत्थर वो सारे

मरीचिका सी लगे बनाने

 

जब उन पर पानी बह चला।

जब वह बहता गया, बहता गया।

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नवलपाल प्रभाकर दिनकर

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