#Kavita by Nawal Pal Prabhakar

हरियाली

 

फूलों की रानी

बहारों की मल्लिका

आज आई है चलकर ,

मेरे घर पर

चेहरा है खिला-खिला।

मुस्कान में छाए मोती

हरे रंग की बाँधी है धोती,

पैरों में बिखरे चमकीले मोती

नाक में पहने सोने की नथनी,

एक हाथ में टेशूं का फूल,

दूसरे हाथ में लिये करधनी

होठों पर लालिमा छाई है।

ऐसे प्यारे मौसम में

स्वयं हरियाली चलकर

अपने मखमली पगो पर,

मुझसे मिलने आई है।

 

नवल पाल प्रभाकर “दिनकर”

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