#Kavita by Nawal Pal Prabhakar

प्रियतम

 

मुझको छोड़ मेरे प्रियतम

दूर कहां तुम जाओगे।

जहाँ कहीं देखोगे आँसू

वहाँ मुझे तुम पाओगे।

रोती बिलखती छोड मुझे

दूर होना यूँ वाजिब नही

बन शैलाब आँसू ये मेरे

जहां को ये देंगे डुबो

फिर बोलो हे मेरे प्रियतम

तुम कैसे बच पाओगे ।

मुझको छोड़ मेरे प्रियतम

दूर कहां तुम जाओगे।

याद करो तुम वो पलछिन

रहते नही थे तुम मेरे बिन

जब मैं तुम्हारी आशा थी

कहाँ गये आज वो दिन

कहा था हाथों में हाथ लेकर

मुझको तुम नही भुलाओगे।

मुझको छोड़ मेरे प्रियतम

दूर कहां तुम जाओगे।

-0-                                       नवलपाल प्रभाकर “दिनकर”

 

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