#Kavita by Nazum Navi Khan

 

में भी चाहता हूँ सोना

 

में भी चाहता हूँ सोना 

सोना एक ऐसी गहरी नींद में 

जिससे ना सुनाई दे भूखो का क्रंदन 

लाचारों की चीखे , अबलाओ की करूण पुकार 

चाहता हूँ बंद आँखे जो ना देखे रक्तरंजित शरीरो को 

पल पल की घिसटती जिन्दगियो को देखते देखते थक सा गया हूँ

में चाहता हूँ एक ऐसी नींद जो ले जाए मुझको ऐसे पीड़ामयी संसार से कोसो दूर 

मुझे चाहिए धार्मिक विकारो से मुक्ति जिनकी आड़ में बेगुनाहो के रक्त से नहा जाती है धरती 

मुझे चाहिए ऐसे सत्ता लोभियो से मुक्ति जो कुर्सी तक लाशो की सीढी लगा कर पहुंचते है 

में भी चाहता हूँ सोना

मुझको दिख जाता है हसते चेहरों के पीछे का दर्द 

गुनगुनाते आवाजों की बीच में आती थरथराहट भी सुन लेता हूँ

हां देखा है संघर्ष करते लोगो की टूटन 

में भी चाहता हूँ सोना 

सोना एक ऐसी गहरी नींद में

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One thought on “#Kavita by Nazum Navi Khan

  • December 7, 2017 at 10:20 am
    Permalink

    NAJMUN BAHI KO SALAM

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