#Kavita by Neeraj Dvivedi

मानव

बहुत लिखा तुमने तिमिर की कहानी
बहुत तुमने गाया तिमिर की कहानी
बहुत तुमने रोका चंदा की छाया
बहुत तुमने रोका दिनकर की किरणें
बहुत तुमने शोषित किया है अमन को
बहुत तुमने पोषित किया है अहम् को
बहुत तुमने अनुग्रह किया है दनुज पर
बहुत तुमने विग्रह किया है धरा पर
बहुत तुमने रोका है नदियों की धारा
बहुत तुमने बोला है विषधर की बोली
बहुत तुमने काटा है सुन्दर विपिन को
बहुत तुमने पीड़ा दिया इस चमन को

चातक बनें फिर रहे स्वयं बादल
विषधर बनें फिर रहे स्वयं मानव

दुर्गति के पथ पर सृजन चल रहा है
दैत्यों के भवन में हवन चल रहा है
ये मानव सृजन की अनोखी कहानी
प्रस्तुत है स्वयं मानव की जुबानी

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