#Kavita by Nirdosh Kumar

मेरी उदास रातों का
सूबूत मांगते हैं वो
मेरे सूखे अश्कों का
निशान मांगते हैं वो
और मुझ फकीर से उफ़
ताज़महल माँगते हैं वो

निर्दोष
9893453078

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