#Kavita by Nirdosh Kumar Pathak

(,,,=दर्द,,,===)

 

मेरा भी दर्द ये पिघलता है

जब आसमाँ पे चाँद निकलता है

ग़र यकीं ना हो तो

पूँछो ओस बूँदों से

जो साथ मेरे

चुपके चुपके रोज रोता है

 

मेरा भी दर्द  ये पिघलता है

जब आसमाँ पे चाँद ढलता है

ग़र यकीं ना हो तो

पूँछो उस पपीहे से

जो साथ मेरे

कभी पीहू पीहू कहता है

निर्दोष

9893453078

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