#Kavita by Nirdosh Kumar Pathak

दर्दों से मेरे……….)

दर्दों से मेरे..
तासीर रंग उनका पूँछा करो न
बहते हैं जब ये आँखों से मेरे
लगते हैं मुझको मोती हैं मेरे
घुलते हैं जब ये साँसों में मेरे
लगते हैं मुझको धड़कन से मेरे
बहते हैं जब ये कलमों से मेरे
लगते हैं मुझको कविता हैं मेरे
निर्दोष
पेन्ड्रा रोड

Leave a Reply

Your email address will not be published.