#Kavita by Nirdosh Kumar

[मरदूद……]

 

 

 

ऐ मरदूद !यूं आंखें ना दिखा

गोटी खेलना हमें आता है

ऊंह !धुंध को और धुंआ ना दिखा

राख बनाना हमको आता है

फीके रंग को और गाढा ना दिखा

लहु से होली खेलना हमें आता है

       निर्दोष कुमार

     

 

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