#Kavita by Nisha Gupta

सावन की बूंदे
देखो इस बारिश को देखो
तन भिगोए मन भरमाये
जैसे जिसकी है जरूरत
वैसा अपना रूप दिखाए
कोई पिया की विरहन देखो
रह रह कर संदेश पहुंचाए
घर की छत टपकती जिसकी
रातो को उसे नींद ना आये
देखो इस बारिश को देखो
तन भिगोए मन जलाए
बूंदों की ठंडी फुहार भी
लगती वैसी जरूरत जिसकी जैसी
आँगन भीगा कमरा भीगा
माँ चूल्हा फिर कैसे जलाए
सोंधी सोंधी खुशबू मिट्टी की
देखो मेरा मन अकुलाए
भीगे बच्चे भीगा बस्ता
कैसे अब वो पाठ पढ़ाये
जाकर कहाँ किताब सुखाए
देखो इस बारिश को देखो
तन भिगोए मन जलाए
खुश किसान है देख ये बूंदे
फसल उसकी मेहनत लहलहाए
अन्न दाता वो हम सबका
ईश्वर उस पर् नेह बरसाए
देखो इस बारिश को देखो
तन भिगोए मन हर्षाये
जैसी जिसकी है जरूरत
वैसा अपना रूप दिखाए
आँगन चमका इंद्रधनुष जब
रंगों का ये पाठ पढ़ाये
बूंदे इस कि जीवन धारा
नही बून्द तो सुना जग सारा
देखो इस बारिश को देखो
तन भिगोए मन भरमाये
जैसे जिसकी है जरूरत
वैसा अपना रूप दिखाए
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निशा गुप्ता

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