#Kavita by Nisha Gupta

मेरी उम्मीद मेरा आसमान
नई उम्मीद है मेरी
नया है आसमा मेरा
सपनो का मेरे है ,रंग बहुत गहरा
चला जिस राह पर भी मैं
नई मंजिल बनाता हूँ
यहां हर चीज मेरी है
ये प्यारा वतन मेरा
नई एक राह भी देखूँ
करूँ इस्तकबाल मैं उसका
कठिन हो रहा उसकी तो
पकड़ लूं हाथ मैं तेरा
लिखूंगा नई इबादत मैं
ये प्यारा वतन मेरा
मिटा दूँगा मैं हस्ती को
अगर जो आंच भी आये
यहां खुदरियों का चलाऊंगा
एक चलन ऐसा
मुझे बस साथ तुम दे दो
बनाने को चमन अपना
चलो कुर्बान होने का
नया जज्बा बनाने का
ये प्यारा वतन मेरा  ,प्यार वतन मेरा
निशा गुप्ता

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