#Kavita by Nisha Gupta

चले हम तुम

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घुल गये सब गिले शिकवे

दिल आबाद हो गए

आपकी एक पहल से

रास्ते कितने खुल गये

 

चले जब साथ हम तुम तो

कारवाँ नित बन गए

मंजिले भी अब तो लगती है करीब

चाहे चलते चलते ता उम्र युहीं गुजर गए

 

ना शिकवा है किसी से

और ना है कोई शिकायत दोस्तो

बस किसी की सोच में हम

यूहीं जा कर बस गए

 

और उसकी याद अब मेरा

मुकद्दर बन गया

मैं हुआ  ना हुआ उसका

वो तो मेरा बन गया

 

निशा गुप्ता

 

 

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