#Kavita by Nitin Singh Narouli

इन   आँधी तुफानो  में,  नवदीप   जलाने निकला हूँ

युवा पीढ़ी के अन्तस् मन को, भान कराने निकला हूँ

सोये हुए  स्वाभिमान को, फिर से जगाने निकला हूँ

गौरवशाली भारत का, तुम्हे बोध कराने निकला हूँ।।

 

महाराणा के चेतक को हाथी से लड़ाने निकला हूँ

युवा शक्ति से भारत को विश्वगुरु बनाने निकला हूँ।

 

 

“यहाँ तो सोये हुए सभी है

अब तुमको ही जगना होगा

भारत की रक्षा करने

तुमको मिलकर लगना होगा

 

तुम ही अब बतलाओगे इन

सूरज चाँद सितारों को

तुम ही ज्ञान कराओगे

इन दहक रहे अंगारो को

 

कि तुम मैं भी कुछ शक्ति है

तुम न पीछे हट जाओगे

नित्य कदम आगे ही बढ़ेंगे

तुम सब कुछ कर जाओगे।

 

तुम भी ताकत रखते हो

तुम सागर को पी जाओगे,

ठान जो ली तो तुम भी तो

इतिहासों में जी जाओगे।

 

तुम न समझो तुम बस

इस धरा धूर के कंकर हो

उठो चलो तांडव दिखलाओ

तुम ही तो वो शंकर हो

 

तुम क्रांतियज्ञ की ज्याला हो

तुम श्री राम वनवासी हो

तुम हो सूरज सी तेज किरण

तुम महावीर अविनाशी हो

 

तुम नील गगन सा अम्बर हो

इस धरा की हुंकार हो तुम

माँ दुर्गा जिस पर बैठी है

वो ही शेर खूंखार हो तुम

 

तुम कुरुछेत्र की गीता हो

तुम रामायण का ज्ञान हो

तुम महाभारत जैसे महान

तुम वेदों का संम्मान हो

 

 

तुम चक्र सुदर्शन कृष्णा का

तुम रघुकुल बाले बाण हो

तुम हो त्रिशूल शिवशंकर का

तुम गोविन्द की कृपाण हो

 

तुम वीर भगत सिंह से तेज

तुम ही तो वो खुदीराम हो

तुम हो गौरव नेता जी का

तुम ही आजाद महान हो

 

तुम लक्ष्मीबाई की विदुशी से

तुम विजयी शिवाजी जैसे हो

महाराणा जो मृत्युदंड दे

तुम भी तो बिलकुल वैसे हो।

 

तुम सात सगरो से गहरे

तुम राजतगिरी पर्वत विशाल

तुम मानसरोवर का जल हो

तुम सत्यसनातन की मिशाल

 

संत विवेकानंद हो तुम

तुम महाकवि तुलसी का ज्ञान

तुम उस रत्नाकर जैसे हो

तुम ही तो हो कबीर की शान।

 

बालक प्रल्हाद सा मन तुममे

तुम मीरा जैसी भक्ति हो

तुम घोर तपस्या भ्रऋषि की

तुम सप्तऋषि की शक्ति हो

 

तुम यमुना की बहती धारा

तुम निर्मल गंगा का जल हो

झांको अपने मन में तुम

तुम ही आने वाला कल हो

 

यूँ शूरवीर होकर भी क्यों

तुमने न प्रितिकार करा

भारत को बांटा गया यहाँ

क्यों तुमने न हुँकार भरा

 

तुम राष्ट्रप्रेम की भाषा से

अपना मुँह खोल नहीं पाए

भूखे पेट पर लात पड़ी पर

तुम भी बोल नहीं पाए।

 

कुछ कायर सत्ताधारी ने

भारत को बटवा डाला था

पूजन करते हो उनका तुम

जिनका तो मुँह ही काला था।

ऐसे भी क्या नेहरू जो

भारत के टुकड़े करते हो

ऐसे भी क्या राष्ट्रपिता जो

दुश्मन की जेबें भरते हो

 

उस देशविरोधी नीति के

कई वंसज यहाँ पर बैठे है

अब बचना उनसे मित्रो तुम

बे बेशुमार ही ऐंठे है

 

तुम ठान ही लो तो देशद्रोही

की दाल नहीं गलने दोगे

भारत में अब देशविरोधी

चाल नहीं चलने दोगे।

 

तुम चाहो तो  ये आतंकी

गतिविधियां रुक जाएँगी

तुम चाहो तो इटली वाली

वो औरत झुक जायेगी

 

मेरी नहीं इस देश की खातिर

सब को मिलकर बढ़ना है

राष्ट्रद्रोह की इस आंधी से

सबको मिलकर लड़ना है

 

तुम्हे वीर अमर सपूतो की

वो भाषा बोलनी ही होगी

मिट जाए कही न भारत ये

अब आँखे खोलनी ही होगी

 

खोलो आँखे देखो तुम

इस चकाचोंध से अब न डरो

उस मृत अतीत को दफनाकर

अनंत भविष्य का भान करो।

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