#Kavita by Nitish Kumar Rajput

कृष्ण की बाँसुरी जब कहीं भी बजे।

मन में प्रीति कोई राधिका सी सजे।।

 

मन समर्पित मेरा कृष्ण के नाम पर

तन की हर सांस में कृष्ण ही है बसा

खुद को आंकु की मीरा सा लगता हूँ मै

सर चढ़ा कृष्ण की बाँसुरी का नशा

 

कान्हा लीला कोई जब कहीं भी रचे

मन में प्रीति कोई राधिका सी सजे।।

 

कृष्ण के रूप पर गोपीयों से मरूं

बन मै मीरा भजूं कृष्ण के नाम को

कान्हा कान्हा मेरा मन कहे रात दिन

जैसे जपती हो सीता प्रभु राम को

 

कृष्ण द्वारे कोई जब भजन सा भजे

मन में प्रीति कोई राधिका सी सजे।।

 

मन विवाहित मेरा कृष्ण से हो गया

इक मधुर सा मिलन मन मेरा अब करे

जैसे मरती है मीणा पे सर्पों की माँ

मन मेरा कृष्ण की बाँसुरी पर मेरे

 

बाँसुरी की धुनों पे जो कोई नचे

मन में प्रीति कोई राधिका सी सजे।।

 

नितिश कुमार ” राजपूत”

 

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