#Kavita by Om Prakash Agrwal , Babua

हे मात मेरी तात मेरे,  हे  मेरे  गुरुवर नमन

तुम जगत के हो नियंता, हे मेरे प्रभुवर नमन

हे गगन के चाँद तारे, भोर के दिनकर नमन

हे अवनि तू पुण्य पावन, और हे अम्बर नमन

हे पुण्य पर्वत और सागर, हे मेरे तरुवर नमन

हे पवन पावन अनल हे प्रिय अचर हे चर नमन

हे मेरे प्रिय मित्र प्यारे, और अरिजन को नमन

नेह की प्रतिमूर्ति मेरी, प्रीत के परिजन नमन

है समर्पित और अर्पित, भोर का प्रियवर नमन

तुम जगत के हो नियंता, हे मेरे प्रभुवर नमन

 

 

🌹ओम अग्रवालः बबुआ

 

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